800kg की भगवत् गीता के बारे में क्या जानते हैं?

About bhagwat gita

जी हां दोस्तों आज हम बात कर रहे श्रीमद्भगवद्गीता की जिसका  लोकार्पण अभी हाल ही मे नरेंद्र मोदी जी के द्वारा इस्कॉन के दिल्ली टेंपल में हुआ था।
आइए बात कर करते हैं इस चर्चित  ग्रंथ के बारे में जो कि विश्व में अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है इसका वजन 800 किलोग्राम बताया जा रहा है, इसको समुद्री मार्ग से इटली के शहर मिलान से लाया गया है इसे बनने में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का खर्च आया है।
यह खर्च इस्कॉन के द्वारा उठाया गया है,
बताया जा रहा है करीब ढाई साल में इस की छपाई हुई है
इस्कॉन के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की ओर से गीता के विश्व भर में प्रचार के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में यह प्रकाशित की गई है। इन्हीं की संस्था से जुड़े वेदांत बुक ट्रस्ट के द्वारा इसकी छ्पाई की गई है प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा दिल्ली इस्कॉन टेंपल में लोकार्पण से पहले इसको इटली के मिलान शहर में प्रदर्शित किया गया था।
तो दोस्तों यह बात हुई इस्कॉन द्वारा अभी चर्चित विश्व की सबसे बड़ी भारी श्रीमदभगवत गीता आकर्षण का केंद्र बनी हुई है कहा जा रहा है कि इसे कुरुक्षेत्र में बन रहे श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर में वर्ष 2020 के बाद स्थापित किया जा सकता है, तब तक इसे दिल्ली के इस्कॉन मंदिर में ही देखा जा सकेगा।

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आइए हम कुछ जानते हैं श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में
श्रीमद भगवत गीता ज्ञान से परिपूर्ण प्राचीन धार्मिक ग्रंथ है इस ग्रंथ मैं समस्त विश्व के सारे प्रश्नों के उत्तर अपने आप मिल जाते हैं, आत्मा-परमात्मा, स्वर्ग-नरक, धर्म -अधर्म, सुख-दुख पाप-पुण्य, देवी-देवता, पूजा-भक्ति, रिश्ते-नाते, अपने-पराए जन्म मृत्यु कर्म प्रकृति पुनर्जन्म स्वर्ग कोई भी ऐसा विषय नहीं है जो श्रीमद्भगवद्गीता से छूटा हो इसलिए इस दिव्य ज्ञान के धार्मिक ग्रंथ पर थोड़ा सा भी संदेह नहीं किया जा सकता। क्योंकि यह ग्रंथ आदिकाल से वर्तमान तक जब तक मनुष्य का अस्तित्व पृथ्वी पर है तब तक इस  ग्रंथ की प्रासंगिकता बनी रहेगी।
श्रीमदभगवत गीता दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत का 1 अध्याय भीष्मा पर्व का हिस्सा है। इसके रचयिता महर्षि वेदव्यास है।
धार्मिक ग्रंथों के आंकड़ों के अनुसार भगवत गीता का उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर अर्जुन को आज से लगभग 7000 वर्ष पहले दिया था।
श्रीमद्भागवत गीता में 18 अध्याय 700 श्लोक जिनमें से 574 श्री कृष्ण द्वारा 84 अर्जुन के द्वारा 41 संजय के द्वारा और 1 धृतराष्ट्र द्वारा कहे गए हैं।
श्रीमद भगवत गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उस समय दिया था जब वह निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे वह घोर अंधकार और निराशा की  स्थिति में थे। वह सांसारिक मोह माया से गिरे हुए थे।


About bhagwat gita

उस समय भगवान श्री कृष्ण ने उनसे कहा जो ज्ञान में तुम्हें दे रहा हूं वही ज्ञान सूर्य ने अपने पुत्र इक्ष्वाकु को दिया था। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि
श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण का अर्जुन को देने से पहले  सूर्य अपने पुत्र को दिया  था ।
श्रीमद भगवत गीता का ज्ञान  अर्जुन के अलावा 4 और लोगों ने सुना, जिनमें पवन पुत्र हनुमान, महर्षि व्यास के शिष्य धृतराष्ट्र की सभा में सम्मानित सदस्य संजय और बर्बरीक थे ।यहां पर आपको बताते चलें बर्बरीक घटोत्कच और अहिलावती के पुत्र तथा भीष्म के पोते थे। जब महाभारत का युद्ध चल रहा था उस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से वरदान प्राप्त किया था कि वह इस युद्ध को देख सकें।


About bhagwat gita

श्रीमद भगवत गीता के 18 अध्याय हैं।
अर्जुन विषाद योग
सांख्य योग
कर्म योग
ज्ञान कर्म सन्यास योग
कर्म सन्यास योग
आत्म संयम योग
ज्ञान विज्ञान योग
ब्रह्म योग
राज ग्रह योग
विश्वरूप दर्शन योग
जीवात्मा योग
गुणत्रय विभाग योग
पुरुषोत्तम योग
श्रद्धात्रय योग
मोक्ष सन्यास  योग
विभूति योग

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