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सरहद पार मां का द्वार shakti peeth temple in pakistan

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shakti peeth temple in pakistan, Hinglaj Mata Temple
Hinglaj Mata Temple

पाकिस्तान के कराची शहर से उत्तर पश्चिम में 250 किलोमीटर की दूरी पर हिंगलाज माता मंदिर बलूचिस्तान प्रांत लारी तहसील के दूरस्थ सुदूर उजाड़ और सकरी पहाड़ी घाटी की गुुफा में स्थित एक बहुत ही प्राचीन मंदिर हैंं। जिसके एक तरफ मकरान रेगिस्तान है और दूसरी तरफ हिंगोल नदी  है  यह छेत्र हिंगोल नेशनल पार्क के अंतर्गत आता है।
कहा जाता है यह मंदिर करीब 2000 वर्ष पुराना है यहां पर जाने का रास्ता बहुत कठिन है।
 हिंगलाज मंदिर के बारे में कहावत है कि आप चाहें गंगाजल से स्नान करें, उत्तर से दक्षिण तक मंदिरों में जाप करें, अयोध्या जाए काशी जाएं, यदि आपने हिंगलाज की यात्रा नहीं की तो आपके  तीर्थों की यात्रा अधूरी है यही कारण है कि हर वर्ष मार्च के महीने में हजारों की संख्या में हिंदू भक्त गण भारत से बलूचिस्तान प्रांत में माता के दर्शन के लिए जाते हैं

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Hinglaj Mata Temple

मंदिर सनातन हिंदू देवी सती पार्वती को समर्पित है साथ ही यह मंदिर शक्ति के 51 पीठों में से एक है
यह मंदिर एक छोटी सी प्राकृतिक गुफा में बनाया हुआ है यहां पर मानव द्वारा निर्मित देवी की कोई मूर्ति नहीं है। एक छोटे आकार के पत्थर को हिंगलाज माता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है
 कहा जाता है विश्व में भगवान शिव मां सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे उसी समय भगवान विष्णु द्वारा अपने चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए गए थे यहां पर पहला टुकड़ा उनका सिर गिरा था। बाकी अन्य टुकड़े हिंदुस्तान के जगह-जगह पर गिरे बाद में वही शक्तिपीठ कहलाए।
देवी पूजा के इन ऐतिहासिक स्थानों में से अधिकांश भारत में हैं, लेकिन भारत के साथ साथ बांग्लादेश में 7 , पाकिस्तान में 3 , नेपाल में 2  और तिब्बत और श्रीलंका में एक-एक शक्तिपीठ है।

यहां देवी को हिंगलाज देवी या हिंगुला देवी के नाम से भी जाना जाता है हाल ही के दशकों में इस जगह ने खासा लोकप्रियता हासिल की है। जो कि पाकिस्तान के हिंदू समुदायों के बीच एक विश्वास का केंद्र बन गया है

हिंगलाज माता के आसपास अन्य और कई भी पूजा स्थल है जैसे गणेश जी, माता काली, गुरु गोरख नाथ धूनी ब्रह्मकुंड त्रिपुंड गुरु नानक आदि पूजा स्थल हैं


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Hinglaj Mata Temple

हिंगलाज माता के मंदिर के लिए पाकिस्तान सही दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं यहां प्रतिवर्ष मेला लगता है। यहां पर हम आपको बताते चलें हिंगलाज मंदिर भारत के राजस्थान और गुजरात में भी स्थित है लेकिन जो सबसे मुख्य मंदिर है वह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत का जिसको सनातन धर्म के शास्त्रों में हिंगोला, हिंगलाज, हिंगलता के नाम से भी जाना जाता है।

पाकिस्तान के मुस्लिम समुदाय भी इसकी पूजा आराधना करते हैं और उसे सुरक्षा प्रदान करते हैं वह इसे नानी का हज  कहते हैं।

यह मंदिर हिंदू और मुस्लिम संप्रदाय के  लोगों में बराबर की श्रद्धा रखता है।
 नवरात्रों के समय यहां पर खासा भीड़ दिखाई देती है प्रतिदिन लगभग 15000 श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के विषय में ब्रह्मव्रत पुराण में इस मंदिर के विषय में अच्छी-खासी व्याख्या की गई है।
इसी से जुड़ी हुई एक और भी कहावत है रावण का वध करने के बाद भगवान राम को ब्रह्माहत्या का पाप लग गया इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम ने माता हिंगलाज देवी के दर्शन के लिए यात्रा की, श्रीराम ने यहां पर एक यज्ञ भी किया।

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पुराणों से जुड़ी हुई एक और कहावत है जिसमें कहा गया है कि 21 बार क्षत्रियों का विनाश करने वाले भगवान परशुराम के क्रोध से बचकर क्षत्रिय माता की शरण में पहुंच गए और याचना करने लगे। इससे माता ने उन्हें ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया।
जिसके कारण भगवान परशुराम से उन्हें अभयदान मिल गया।

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