भारत-पाक के तनाव के बीच चीन तटस्थ क्यों?

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भारत-पाक के तनाव के बीच चीन
भारत चीन का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है भारत की सीमा चीन से लगी हुई है, दोनों देशों के बीच लगभग 3000 से ज्यादा किलोमीटर की सीमा है दोनों देशों के साझा हित हैं दोनों देश एक दूसरे के लिए काफी मायने रखते हैं दोनों एशिया के सबसे बड़े देश हैं।
भारत और चाइना के बीच 1962 में एक युद्ध भी हो चुका है जिसमें दुर्भाग्यवश भारत को हार का सामना करना पड़ा था। चीन ने चाइना पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया है,
इस लिहाज से देखें तो चाइना इस समय या पिछले कुछ दशकों से पाकिस्तान का सबसे बड़ा दोस्त उभर कर सामने आया है हालांकि चाइना और पाकिस्तान हमेशा से ही एक दूसरे के मित्र रहे हैं।
इधर भारत और पाकिस्तान में हमेशा शत्रुता पूर्ण संबंध रहे हैं दोनों देशों के बीच कई युद्ध हो चुके हैं, इनके अलावा कश्मीर को लेकर भी दोनों देशों के बीच अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती है।
1965 और 1971 के भारत पाकिस्तान के युद्ध में चाइना की कोई भूमिका नहीं रही, हिंदुस्तान पकिस्तान में युद्ध के समय  पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन ने  भारत के विरुद्ध युद्ध में उसकी कोई सहायता नहीं की थी।


भारत-पाक के तनाव के बीच चीन


जब भारत और पाकिस्तान में टकराव की स्थिति बनती है तो समस्त विश्व को चाइना का इंतजार रहता है की चाइना अपनी क्या प्रतिक्रिया देता है।
पाकिस्तान को हमेशा लगता है चाइना की सहानुभूति उसके साथ रहेगी पर कश्मीर मुद्दे को लेकर चाइना हमेशा पाकिस्तान को आईना दिखाता है और शिमला समझौते का हवाला दे देता है।  कश्मीर मुद्दे पर भारत भी किसी तीसरे पक्ष को स्वीकार  नहीं करता।
अभी पिछले महीने पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंध सबसे निचले स्तर पर चले गए थे युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं
इस आतंकी हमले भारत के 40 से ज्यादा सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए थे।
इसका बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की,
इस से तिल मिला कर पाकिस्तान ने एलओसी के पास भारत के एक लड़ाकू विमान को गिराया और पायलट को गिरफ्तार कर लिया
इस प्रक्रिया के दौरान पाकिस्तान को अपना एक f-16 फाइटर जेट गवाना पड़ा लेकिन पाकिस्तान ने इसे अभी तक स्वीकार नहीं किया है।
भारत ने बांग्लादेश के निर्माण से पहले 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में इस तरह का हमला किया था उसके बाद भारतीय वायु सेना ने कभी l.o.c. पार नहीं की।
चाइना और पाकिस्तान की आर्थिक रिश्ते काफी करीबी है पाकिस्तान चाइना का सबसे बड़ा सैन्य साजो सामान का खरीददार है २००८ से अभी तक पकिस्तान ने चीन से ६ अरब डॉलर के हथियार खरीदे है।
इसी कारण वह पाकिस्तान से अपने रिश्ते को खराब करना नहीं चाहता पर चीन यह भी नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह अमेरिका के पाली में चला जाए।
भारत-पाक के तनाव के बीच चीन

चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से भारत और पाकिस्तान दोनों को ही आत्म संयम बरतने की सलाह दी गई थी और क्षेत्र की शांति पर ध्यान देने के लिए कहा था
ऐसे समय में जब पश्चिम के ज्यादातर देश भारत के पक्ष में हैं और आतंकवाद को लेकर चाइना पर हमला करने के लिए  तैयार बैठे हैं,  यूएन में जब भी भारत ने मसूद अजहर को अतंकी घोषित करवाने की कोशिश की  चाइना ने उस पर हमेशा  रुकावट डाली।
भारत-पाक के तनाव के बीच चीन

भारत का स्पष्ट कहना है कि उसने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर नहीं  बल्कि उसने जैश ए मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर बमबारी की थी जो कि भारत में आतंकी हमलों की फिराक में बैठे थे।
खुद आतंकवाद से पीड़ित चाइना  ने आतंकवाद के नाम पर वहां के मुस्लिमो को नजर बंद करके रखा हुआ है। चाइना की इस नीति का संसार भर में विरोध हो रहा है ।इसीलिए वह भारत पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह के सवाल नहीं उठा सकता।
उधर पाकिस्तान में चीन कई कारणों से पाकिस्तान पर निर्भर है इनमें से सबसे बड़ा कारण चाइना पाकिस्तान आर्थिक गलियारा है जिसमें करीब 60000 चीनी नागरिक काम करते हैं इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आर्मी को  दी गई है
चाइना में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत पाकिस्तान में बड़ी सैन्य कार्यवाही करता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि भारत के प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी अपनी राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ऐसा निर्णय ले सकते हैं लेकिन आतंकवाद के खिलाफ भारत के पक्ष को समझा जा सकता है।।

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