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भारत में संसार का सबसे महँगा चुनाव ?

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एक जीवंत लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि सबसे अच्छे नागरिक को जनप्रतिनिधियों के रूप में चुना जाए, इससे जनजीवन में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है, साथ ही ऐसे उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ती है जो सकारात्मक सोच  पर चुनाव जीतते हैं। एक जीवंत लोकतंत्र में मतदाता को उम्मीदवारों को चुनने का या अस्वीकार करने का अवसर दिया जाना चाहिए जो राजनीतिक दलों को चुनाव में अच्छे उम्मीदवार उतारने पर मजबूर करेगा।
                                                                                                                                माननीय सर्वोच्च न्यायालय


अबकी बार चुनाव में कितना खर्चा सरकार ?

general election 2019, india's most expensive

यह प्रश्न अपने आप में ही बहुत जटिल है क्योंकि इस बार कहा जा रहा है जो भारत के आम चुनाव होने वाले हैं वह संसार के सबसे महंगे चुनाव साबित हो सकते हैं!!
संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत देश में आम चुनाव 2019 की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो गई है तकरीबन डेढ़ महीने तक चलने वाले इन चुनावों में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक करोड़ों भारतीय मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे

क्या आपको इस चुनाव (Lok Sabha Election) 2019 में होने वाले खर्च का अंदाजा है??

11 अप्रैल से 19 मई तक होने वाले Lok Sabha Election में करीब 50,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वर्ष 2016 में हुए अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव  में इससे कम रकम खर्च हुई थी।
अमेरिका स्थित एक चुनाव विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत में आगामी आम चुनाव भारत के इतिहास में और किसी भी लोकतांत्रिक देश के सबसे खर्चीले चुनावों में से एक होगा। 'कारनीज एंडोमेंट फोर इंटरनेशनल पीस थिंकटैंक' में सीनियर फेलो तथा दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव ने पीटीआई-भाषा को बताया कि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तथा कांग्रेस चुनावों में  46,211 करोड़ रुपये (6.5 अरब अमेरिकी डॉलर) का खर्च आया था
भारत में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में 35,547 करोड़ रुपये (पांच अरब अमेरिकी डॉलर) खर्च हुए थे तो 2019 के चुनाव में यह आंकड़ा आसानी से पार हो सकता है, ऐसा हुआ तो यह दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव साबित होगा।
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (CMS) के मुताबिक, 2014 के Lok Sabha Election से इस बार खर्च 40 फीसदी ज्यादा रह सकता है।
चुनावी खर्चे पर सेंटर फॉर मीडिया स्टडी के अनुसार 1996 में लोकसभा चुनावों में 2500 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। जो लगातार बढ़ते हुए 2019 तक 50000 करोड़ तक पहुंच गया
दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस देश की आधे से ज्यादा आबादी रोजाना ढाई सौ रुपए से कम से की आमदनी में अपना गुजारा करती है, उस देश के आम चुनावों में प्रति वोटर का खर्च प्रति वोटर लगभग ₹850 हो रहा है।
CMS के चेयरमैन भास्कर राव ने कहा, "Lok Sabha Election का खर्च बढ़ने की प्रमुख वजह सोशल मीडिया, ट्रेवल और विज्ञापन के खर्च में हुई वृद्धि है।" 

एक  उम्मीदवार 50 लाख रुपये से 70 लाख रुपये तक खर्च कर सकता है, यह उस राज्य पर निर्भर करता है, जिसमें वह लोकसभा चुनाव लड़ रहा हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों में, एक उम्मीदवार अधिकतम 70 लाख रुपये खर्च कर सकता है। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम मैं यह राशि 54 लाख रुपये है। और, यह दिल्ली के लिए 70 लाख रुपये और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 54 लाख रुपये है।इसमें एक राजनीतिक पार्टी द्वारा खर्च किया गया धन या उम्मीदवार के अभियान के लिए एक समर्थक शामिल है। लेकिन, पार्टी के कार्यक्रम के प्रचार के लिए किसी पार्टी या किसी पार्टी के नेता द्वारा किए गए खर्च को कवर नहीं किया जाता है।उम्मीदवारों को कानून के तहत पोल प्रहरी के साथ एक अलग खाता रखना होगा और चुनाव खर्च को दर्ज करना होगा। एक गलत खाता या खर्चे से अधिक व्यय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 ए के तहत तीन साल तक के लिए अयोग्यता का कारण बन सकता है।सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनावों के पूरा होने के 90 दिनों के भीतर अपने चुनाव खर्च का एक बयान चुनाव आयोग को देना होता है। और सभी उम्मीदवारों को चुनाव पूरा होने के 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण मतदान कक्ष में प्रस्तुत करना  होता है कि  लोकसभा चुनावों में कितना खर्च आया?
इतने बड़े पैमाने पर Lok Sabha Election कराने में कई तरह की चुनौतियां हैं। हम आपको कुछ चौंकाने वाले आंकड़े बता रहे हैं जिनकी जानकारी केंद्रीय चुनाव आयोग ने Lok Sabha Election कार्यक्रम घोषित करने के दौरान दी है।

  चुनाव आचार संहिता क्या है ? What is the model code of conduct ?

2014 के आम  चुनावों में  250 करोड़ सोशल मीडिया का खर्च रहा था, जो इस बार बढ़कर 5000 करोड़ रुपए हो गया है यह तथ्य चौंकाने वाले हैं कोई भी राजनीतिक पार्टी हो सोशल मीडिया कैंपेनिंग बहुत जबरदस्त चल रही है जिसमें यह खर्च अनुमानित किया गया हैं।
भारत में पहले हुए लोकसभा चुनावों में लगभग 17 करोड योग्य मतदाता थे यदि हम पिछले लोकसभा चुनावों की बात करें तो करीबन 81 करोड़  योग्य मतदाता थे लेकिन केवल 55 करोड़ लोगों ने ही अपने मताधिकार का उपयोग किया 2019 के लोकसभा चुनावों में 90 करोड़ मतदाता वोट डाल सकेंगे।
यदि हम तुलनात्मक रूप से बात करें तो 2014 में लोकसभा चुनाव  के समय योग्य मतदाताओं की सूची में लगभग  8.50 करोड़ नए मतदाता जुड़ गए हैं जो 2019 में अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे।
इनमें भी 1.5 करोड़ ऐसे मतदाताओं की संख्या है जिनकी उम्र 18 से 19 साल है यह लोग पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे भारत देश की लगभग दो तिहाई आबादी की उम्र 35 वर्ष से कम हैं।
2014 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ट्रांसजेंडर रों को तीसरे जेंडर के रूप में मान्यता दी गई थी 2019 में 38,325 ट्रांसजेंडर भी अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे।
इस महा चुनाव के महाकुंभ के लिए लगभग 11 लाख electronic voting machine ईवीएम की व्यवस्था की जाएगी।
आगामी आम चुनाव के लिए लगभग 10 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
वर्ष 2014 में संपन्न हुए आम चुनावों में 8251 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। पूरे देश में तकरीबन 3626 राजनीतिक पार्टियां हैं हालांकि भारत के चुनाव आयोग ने केवल 1841 पार्टियों को ही मान्यता दी है।
भारत के निचले सदन यानी लोकसभा में कुल 545 सीटें हैं जिनमें 543  सीटों के लिए चुनाव होंगे  2 सीटें  आरक्षित हैं

पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में चुनाव अधिकारियों ने राजनेताओं और उनके समर्थकों के पास से 4.2 करोड़ डॉलर जब्‍त किए थे. इसमें वोट खरीदने के लिए भी पैसे थे. उम्‍मीदवारों को केवल एक लाख डॉलर खर्च करने की इजाजत है।
केंद्र सहित सभी पार्टियों ने कसी कमर
सभी दलों ने चुनाव प्रचार के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है। सत्तापक्ष का फोकस दुबारा से वापसी करने का है, वहीं विपक्षी दलों के प्रत्याशी भी केंद्र सरकार को घेरते हुए अपने प्रचार का ताना-बाना बुन रहे हैं। इस बार चुनाव आयोग की नजर टीवी, अखबार और रेडियो के अलावा सोशल मीडिया पर रहेगी, जिसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 

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