black hole first image 2019/ horizon टेलीस्कोप के द्वारा ली गई ब्लैक होल की पहली तस्वीर

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black hole first image 2019
black hole real image

जब से मानव धरती पर आया तभी से वह चांद और तारो  के पार  जाने की कोशिश में जुट गया इस प्रयास में कई अनसुलझे रहस्य से पर्दा भी हटा और हमें अंतरिक्ष की दुनिया की अनोखी जानकारियां भी हासिल हुई।
आकाशगंगा में पाया जाने वाला ब्लैक होल भी सदियों से इंसानों के लिए जिज्ञासा का केंद्र रहा है। धरती से करोड़ों किलोमीटर दूर और सूर्य से कई गुना बड़े ब्लैक होल के बारे में पता लगाने के लिए अनेक खगोलशास्त्री सैकड़ों सालों से लगातार प्रयास में जुटे रहे। और इसका नतीजा की पहली बार ब्लैक होल की तस्वीर को कैमरे में कैद किया गया।
यह संसार के विज्ञान और खगोलशास्त्र की  महत्वपूर्ण उपलब्धि  है।
वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम जनता ने भी इस समय ब्लैक होल के अनोखे चित्रों को देखा।
अपने केंद्र में आने के बाद ब्रह्मांड की सभी चीजों को अपने में समाहित कर लेने वाले इस ब्लैक होल की तस्वीर सामने आने पर कई सारे अनसुलझे पहलु को सुलझाने में मदद मिलेगी।
ब्लैक होल के रहस्य और उपलब्धि  को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने किस तरह के प्रयास किए आइये जानते हैं इस बारे में।
उनकी तस्वीर दुनिया के लोगों ने देखी।
अंतरिक्ष के बारे में जाने को लेकर उत्सुक दुनिया भर के लोग ब्लैक होल की पहली तस्वीर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब तक इसके बारे में सिर्फ परिकल्पना ही की गई थी। इसके पहली तस्वीर जारी होने पर वैज्ञानिकों ने इसे ऐतिहासिक पल करार किया है, वैज्ञानिकों को उम्मीद है इससे ब्रह्मांड के रहस्य को समझने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं में  यह बहुत ही इंटरेस्टिंग विषय रहा है इस लिहाज से 10 अप्रैल का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है  वैज्ञानिकों ने एक साथ ब्राज़ील,ताइपे, शंघाई, टोक्यो दुनिया के कई में देशों एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारी दी।
होरिज़ोन टेलीस्कोप शोध और  200 से ज्यादा वैज्ञानिक की मेहनत का नतीजा है की इसकी पहली तस्वीर दुनिया सामने आयी। इस मौके पर समिति के डायरेक्टर ने कहा कि हमने आज उस चीज को खोज निकाला है जो संसार के आरंभ से रहस्यमई बनी हुई थी। उन्होंने कहा हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने वह हासिल किया है जिसे देखना असंभव था, हमने एक ब्लैक होल का चित्र देखा लिया यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। आप यहां जो देख रहे हैं वह अंतिम फोटोन ऑर्बिट है अब हमारे पास एक ब्लैक होल के लिए दृश्य  प्रमाण है। यानी ब्लैक होल की रियल तस्वीर है
इस ब्लैक होल की तस्वीर टेलिस्कोप की मदद से खींची गई है। यह ब्लैक होल धरती से करीब  5.4 crore Prakash varsh दूर हैं
इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से लगभग  6.5 अरब गुना  ज्यादा  है। यह  ब्लैक होल M-87 गैलेक्सी में स्थित है।
इसकी तस्वीर लेना बहुत ही कठिन कार्य है इसकी तस्वीर  लेना इतना कठिन है कि जैसे आप धरती पर खड़े होकर चांद पर किसी सूक्ष्म वस्तु की तस्वीर ले रहे हो।
किसी भी ब्लैक होल की तस्वीर लेना असंभव है क्योंकि ब्लैक होल प्रकाश को भी निगल जाता है। ब्लैक होल की अपनी एक सीमा है जिसके अंदर आने वाली हर चीज को वह अपने केंद्र में समा लेता है, ब्लैक होल  जब विभिन्न पिंडो को प्रकाश को अपनी ओर खींचता है, तो गोलाकार घूमती हुई एक आकृति बन जाती है जो कि छल्ले जैसी प्रतीत होती है वैज्ञानिकों ने इसी की तस्वीर ली है।
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने सापेक्षता का सिद्धांत दिया था और पुष्ट हुआ है यह वही है जिसे कुछ भी असंभव माना जाता था।लोगों ने इस तस्वीर के बाद वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भी याद किया।
कई सालों से दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से ही रोमांच से भरी हुई है हमेशा से ही खगोल शास्त्रियों के लिए एक चुनौती भरा रहा है।जिज्ञासा पैदा करती रही है, वह एक ऐसा ही खगोलीय पिंड है जो अपने भीतर अनोखे रहस्य छुपाए हुए हैं जब से मनुष्य ब्रह्मांड के बारे में जानने समझने का प्रयास कर रहा है लेकिन हमेशा से उसकी जिज्ञासा के केंद्र में रहा है ब्लैक होल  की दुनिया रोचक ही नहीं आश्चर्यजनक भी है।
ब्लैक होल क्या है ??
इसका जन्म कैसे होता है ??
जानने की कोशिश करते हैं !

black hole first image 2019
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ब्लैक होल इतना गहरा होता है कि उसमें कोई भी पिंड तारा ग्रह किसी भी तरह का उपग्रह आदि सभी को अपनी ओर खींच लेता है उसकी बनावट इस प्रकार है कि उसकी सीमा में आने वाली किसी भी चीज को वह अपने अंदर निगल लेता है। ब्लैक होल में सिर्फ और सिर्फ अंधकार ही होता है क्योंकि इसका गुरुत्वाकर्षण बल इतना  शक्तिशाली होता है कि प्रकाश को भी अवशोषित कर लेता है इसीलिए यह दिखाई नहीं देता।
ब्लैक होल को जानने के लिए हमें तारों के जन्म में चलना होगा जैसा कि हमें ज्ञात है तारों का विकास आकाशगंगा में मौजूद गैस और प्रकाश से होता है जिसे निहारिका कहते हैं निहारिका के अंदर हाइड्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है उसके बाद हीलियम और कुछ मात्रा में और भी तत्व होते हैं।
जब किसी बड़े तारे की पूरी ऊर्जा खत्म हो जाती है तो जबरदस्त विस्फोट होता है,जिसे सुपरनोवा कहते हैं। इस विस्फोट के बाद जो पदार्थ बनता है वह धीरे धीरे सिमटने लगता है और बहुत ही घनी पिंड का रूप ले लेता है।जिसे  neutro stone कहते है न्यूट्रो स्टोन जितना ही मजबूत होता है गुरुत्वाकर्षण दवा उतना ही अधिक होता है, और इसके चलते तारे सीमटनें लगते हैं और धीरे-धीरे ब्लैक होल का रूप ले लेते हैं।
1783 में सबसे पहले जॉन मिशेल ने ब्लैक होल के बारे में बताया।
1796 में पियारे साइमन ने विस्तार से इस बारे में चर्चा की।
अमेरिका के भौतिक विद वैज्ञानिक ने 1967 में पहली बार ब्लैक होल शब्द का प्रयोग किया।
भार और आकार के हिसाब से ब्लैक होल तीन प्रकार के होते हैं। इनमें से सबसे विशाल ब्लैक होल सुपरमैसिव ब्लैक होल होते हैं, यह ब्लैक होल सूर्य की कई मिलियन शक्ति के बराबर होते हैं यह ब्लैक होल आकाशगंगा के बीच में मौजूद होते हैं। जहां पर बहुत सारे तारे होते हैं यही कारण है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल हमेशा बढ़ते रहते हैं।
स्टेलर ब्लैक होल सामान्य रूप से पाए जाने वाले ब्लैक होल होते हैं जिनका का वजन लगभग सूर्य से 20 गुना ज्यादा होता है। सामान्यता यह तब बनते हैं जब कोई बहुत बड़ा तारा टूट जाता है इस प्रक्रिया को सुपरनोवा कहते हैं।
तीसरे प्रकार के ब्लैक होल, मिनिएचर ब्लैक होल कहलाते हैं हालांकि मिनिएचर ब्लैक होल की अभी तक खोज नहीं हो पाई है।
पृथ्वी के सबसे पास ब्लैक होल लगभग 1600 प्रकाश वर्ष दूरी पर है इसका प्रभाव पृथ्वी के सौरमंडल और हमारी पृथ्वी पर नहीं पड़ता है क्योंकि इस ब्लैक होल  की गुरुत्वाकर्षण परिधि से काफी दूरी पर स्थित है हमारी पृथ्वी।
हमारी पृथ्वी सौर मंडल के सदस्य है और सूरज इसका केंद्र हमारा सौरमंडल हमारे ब्रह्मांड का एक मामूली सा हिस्सा है लेकिन यह ब्रह्मांड पृथ्वी से देखने वाली आकाशगंगा का एक छोटा सा हिस्सा है  इसी आकाशगंगा में ब्लैक होल पाए जाते हैं और वे आकाशगंगा में 1 दर्जन से ज्यादा black hole का पता लगाया है.

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